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Thursday, April 14, 2011

लड़कियों के डर

लड़कियों के डर भी अजीब होते हैं,

भीड़ में हों तो लोगों का डर,
अकेले में हों तो सुनसान राहों का डर,

गर्मी में हों तो पसीने से भीगने का डर,
हवा चले तो दुपट्टे के उड़ने का डर,

कोई न देखे तो अपने चेहरे से डर,
कोई देखे तो देखने वाले की आँखों से डर,

राह में कड़ी धूप हो तो,
चेहरे के मुरझाने का डर,

वो डरती हैं और तब तक डरती हैं, जब तक उन्हें कोई जीवन साथी नहीं मिल जाता, और वही व्यक्तित्व महान  होता हैं जिसे वो सबसे ज्यादा डराती हैं ..........

Tuesday, April 12, 2011

लड़कियों के डर भी अजीब होते हैं

भीड़ में हों तो लोगों का डर
अकेले में हों तो सुनसान राहों का डर

गर्मी में हों तो पसीने से भीगने का डर
हवा चले तो दुपट्टे के उड़ने का डर

कोई न देखे तो अपने चेहरे से डर
कोई देखे तो देखने वाले की आँखों से डर

राह में कड़ी धुप हो तो,
चेहरे के मुरझाने का डर

वो डरती हैं और तब तक डरती हैं जब तक उन्हें कोई जीवन साथी नहीं मिल जाता और वही वो व्यक्ति होता हैं जिसे वो सबसे ज्यादा डराती हैं| ..........

Saturday, April 9, 2011

मैं हवा हूँ, कहाँ वतन मेरा...


मैं हवा हूँ, कहाँ वतन मेरा...


अब कहाँ हूँ, कहाँ नहीं हूँ मैं...
जिस जगह हूँ, वहाँ नहीं हूँ मैं...
कौन आवाज़ दे रहा है मुझे...?
कोई कह दे, यहाँ नहीं हूँ मैं...!


मैं हवा हूँ, कहाँ वतन मेरा...
दस्त-ए-में या ना, चमन मेरा

मय के हर चंद, एक ख्व़ा ना नशीं 
अंजुमन-अंजुमन सुखन मेरा...
दस्त-ए-में या ना, चमन मेरा
मैं हवा हूँ, कहाँ वतन मेरा...


बर्ग-ए-गुल पर, चराग सा क्या है...?
छू गया था उसे, दहन मेरा...
दस्त-ए-में या ना, चमन मेरा
मैं हवा हूँ, कहाँ वतन मेरा...


मय के टूटा हुआ सितारा हूँ...
क्या बिगाड़ेगी, अंजुमन मेरा...
दस्त-ए-में या ना, चमन मेरा
मैं हवा हूँ, कहाँ वतन मेरा...


हर घड़ी एक नया तकाज़ा है...
दर्द-ए-सर बन गया, बदन मेरा
दस्त-ए-में या ना, चमन मेरा
मैं हवा हूँ, कहाँ वतन मेरा...