अनमोल आभूषण
अनमोल आभूषण (यदि आप इसे मोबाइल पर देख रहे हैं तो कृपया बेहतर परिणामों के लिए अपनी ब्राउज़र सेटिंग्स को डेस्कटॉप / कंप्यूटर मोड में बदलें।) अंशु अपने ऑफिस पहुंची ही थी कि मोहन को अपने केबिन की तरफ तेजी से भागते हुए देखा। केबिन में पहुंच कर मोहन दुखी मन से बैठ गया। अंशु ने उसके दुखी होने का कारण जानना चाही। मोहन ने बताया "लोग जो चाहते हैं वो उन्हें मिल जाता है, लेकिन मुझे क्यों नहीं मिलता ?" तब अंशु ने उसकी समस्या को समझते हुए और सुलझाते हुए समय और धैर्य का मतलब एक साधु की कहानी से समझाया। ====>> एक साधु नदी के घाट किनारे अपना डेरा डाले हुए थे। वहाँ वह धुनी रमा कर दिन भर बैठे रहते थे और बीच-बीच में ऊँची आवाज़ में चिल्लाते थे, “जो चाहोगे सो पाओगे!”। उस रास्ते से गुजरने वाले लोग उन्हें मानसिक रूप से पागल-विक्षिप्त समझते थे। वे लोग साधु की बात सुनकर अनुसना कर देते और जो सुनते वे उन पर हँसते थे। एक दिन एक बेरोजगार युवक उस रास्ते से गुजर रहा था। साधु की चिल्लाने की आवाज़ उसके कानों में भी पड़ी – “जो चाहोगे सो पाओगे!” “जो चाहोगे सो पाओगे!”। ये वाक्य सुनकर वह ...