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अनचाहा डर

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रूबीना का रिजर्वेशन जिस बोगी में था, उसमें लगभग सभी लड़के ही थे, हां, कुछ गिने चुने महिलाएं जरूर होंगी, लेकिन लड़कों की संख्या ज्यादा थी। अब एक अंदर का डर सताने लगा, कि अब क्या होगा, कैसे सफर कटेगा, आदि सवालों का घेरा मन में उमरने घुमरने लगा।  बहुत हिम्मत जुटा कर टॉयलेट जाने के बहाने रुबिना पूरी बोगी घूम आई थी, मुश्किल से दो या तीन औरतें होंगी । मन अनजाने भय से काँप सा गया। पहली बार अकेली सफर कर रही थी, इसलिये पहले से ही घबराई हुई थी। अतः खुद को सहज रखने के लिए चुपचाप अपनी सीट पर मैगज़ीन निकाल कर पढ़ने लगी। नवयुवकों का झुंड, जो शायद किसी कैम्प जा रहे थे, के हँसी - मजाक , चुटकुले आदि उसके हिम्मत को और भी तोड़ रहे थे । रूबिना के भय और घबराहट के बीच अनचाही सी रात धीरे - धीरे उतरने लगी । सहसा सामने के सीट पर बैठे लड़के ने कहा -- " हेलो , मैं एहसान और आप ? " भय से पीली पड़ चुकी रुबिना ने कहा -- " जी मैं ........." "कोई बात नहीं , नाम मत बताइये । वैसे कहाँ जा रहीं हैं आप ?" रुबिना ने धीरे से कहा-- "इलाहबाद" "क्या इलाहाबाद"... ? वो तो मेरा नान...

पाप की गठरी

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पाप की गठरी एक बार की बात है... किसी राजा ने यह फैसला लिया के वह प्रतिदिन 100 अंधे लोगों को खीर खिलाया करेगा। एक दिन खीर वाले दूध में सांप ने मुंह डाला और दूध में विष डाल दी और ज़हरीली खीर को खाकर 100 के 100 अंधे व्यक्ति मर गए। राजा बहुत परेशान हुआ कि मुझे 100 आदमियों की हत्या का पाप लगेगा। राजा परेशानी की हालत में अपने राज्य को छोड़कर जंगलों में भक्ति करने के लिए चल पड़ा, ताकि इस पाप की माफी मिल सके। रास्ते में एक गांव आया। राजा ने चौपाल में बैठे लोगों से पूछा कि क्या इस गांव में कोई भक्ति भाव वाला परिवार है ? ताकि उसके घर रात काटी जा सके। चौपाल में बैठे लोगों ने बताया कि इस गांव में दो बहन भाई रहते हैं जो खूब बंदगी करते हैं। राजा उनके घर रात ठहर गया। सुबह जब राजा उठा तो लड़की पूजा पर बैठी हुई थी । इससे पहले लड़की का रूटीन था कि वह दिन निकलने से पहले ही पूजा से उठ जाती थी और नाश्ता तैयार करती थी। लेकिन उस दिन वह लड़की बहुत देर तक पूजा पर बैठी रही। जब लड़की उठी तो उसके भाई ने कहा कि बहन तू इतना लेट उठी है ,अपने घर मुसाफिर आया हुआ है। इसने नाश्ता करके दूर जाना है।  तो लड़की ने जवाब द...

लालची इश्क़

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  ट्रैन के ए.सी. कम्पार्टमेंट में मेरे सामने की सीट पर बैठी लड़की ने मुझसे पूछा " हैलो, क्या आपके पास इस मोबाइल की सिम निकालने की पिन है??"  उसने अपने बैग से एक फोन निकाला था, और नया सिम कार्ड उसमें डालना चाहती थी। लेकिन सिम स्लॉट खोलने के लिए पिन की जरूरत पड़ती है जो उसके पास नहीं थी। मैंने हाँ में गर्दन हिलाई और अपने क्रॉस बेग से पिन निकालकर लड़की को दे दी। लड़की ने थैंक्स कहते हुए पिन ले ली और सिम डालकर पिन मुझे वापिस कर दी।  थोड़ी देर बाद वो फिर से इधर उधर ताकने लगी, मुझसे रहा नहीं गया.. मैंने पूछ लिया "कोई परेशानी??" वो बोली सिम स्टार्ट नहीं हो रही है, मैंने मोबाइल मांगा, उसने दिया। मैंने उसे कहा कि सिम अभी एक्टिवेट नहीं हुई है, थोड़ी देर में हो जाएगी। और एक्टिव होने के बाद आईडी वेरिफिकेशन होगा उसके बाद आप इसे इस्तेमाल कर सकेंगी।  लड़की ने पूछा, आईडी वेरिफिकेशन क्यों??  मैंने कहा " आजकल सिम वेरिफिकेशन के बाद एक्टिव होती है, जिस नाम से ये सिम उठाई गई है उसका ब्यौरा पूछा जाएगा बता देना" लड़की बुदबुदाई  "ओह्ह " मैंने दिलासा देते हुए कहा "इसमे कोई ...

क्या तुझपे नज़्म लिखूँ

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क्या तुझपे नज़्म लिखूँ, और कैसा गीत लिखूँ... क्या तुझपे नज़्म लिखूँ, और कैसा गीत लिखूँ जब तेरी तारीफ़ करूँ, सुर-ताल में मीत लिखूँ "कलावती"   में तेरी छवि है, मुखड़ा रूप का दर्पण तेरे लबों के रंग में पाए, मैंने " लाली अमन" हवा में उड़ती लट का स्वागत करती  "जयजयवंती" महका-महका, खिला-खिला सा तेरा रंग  बसंती बाली कमर पे जैसे  "पहाड़ी"  पर घनघोर घटाएं "मेघ"  से नैना सावन भादों, प्रेम का रस बरसाये तेरी  "सोहनी"  मोहनी सूरत, कोमल कंचन काया जान-ए- ग़ज़ल किस्मत से पायी, तेरे हुस्न की  "छाया" जिसमें सुखन " रागेश्वरी" , रूहे-संगीत लिखूँ क्या तुझपे नज़्म लिखूँ, और कैसा गीत लिखूं तेरी " धानर " चुनरिया लहरे, जैसे मधुर बयार प्यार का गुलशन महका-महका, तुझसे जाने बहार तेरी एक झलक है  "काफ़ी" , मुझको जान से प्यारी चाल नशीली देखकर तेरी, रख्श करें  "दरबारी" सर से पाँव तलक दिलकश, अंदाज तेरा " शहाना " तू मेरी  "गुलकली"  है जानम, मैं तेरा हूँ दीवाना तेरी चाहत दिल मे लेकर, घूमा देश-विदेश तुझस...

बोलना भी एक कला है।

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बोल कहाँ पर बोलना है, और कहाँ पर बोल जाते हैं। जहाँ खामोश रहना है, वहाँ मुँह खोल जाते हैं।। कटा जब शीश सैनिक का, तो हम खामोश रहते हैं। कटा एक सीन पिक्चर का, तो सारे बोल जाते हैं।। नयी नस्लों के ये बच्चे, जमाने भर की सुनते हैं। मगर माँ बाप कुछ बोले, तो बच्चे बोल जाते हैं।। बहुत ऊँची दुकानों में, कटाते जेब सब अपनी। मगर जब मज़दूर माँगेगा, तो सिक्के बोल जाते हैं।। अगर मखमल करे गलती, तो कोई कुछ नहीँ कहता। फटी चादर की गलती हो, तो सारे बोल जाते हैं।। हवाओं की तबाही को, सभी चुपचाप सहते हैं। च़रागों से हुई गलती, तो सारे बोल जाते हैं।। बनाते फिरते हैं रिश्ते, जमाने भर से अक्सर हम। मगर घर में जरूरत हो, तो रिश्ते भूल जाते हैं।। कहाँ पर बोलना है, और कहाँ पर बोल जाते हैं। जहाँ खामोश रहना है, वहाँ मुँह खोल जाते हैं।।        ✍अज्ञात✍        🙏🙏🙏🙏🙏

मैं शिव हूँ...

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  मैं शिव हूँ   मैं शिव हूँ, मैं शिव हूँ, मैं शिव हूँ... मैं वीभत्स हूँ, विभोर हूँ, मैं समाधी में ही चूर हूँ घनघोर अँधेरा ओढ़ के मैं जन जीवन से दूर हूँ श्मशान में हूँ नाचता, मैं मृत्यु का ग़ुरूर हूँ साम - दाम तुम्हीं रखो, मैं दंड में सम्पूर्ण हूँ... मैं शिव हूँ, मैं शिव हूँ, मैं शिव हूँ... चीर आया चरम मैं, मार आया "मैं" को मैं "मैं", "मैं" नहीं "मैं" भय नहीं जो तू सोचता है मैं केवल वो भी नहीं मैं काल का कपाल हूँ, मैं मूल की चिंघाड़ हूँ... मैं शिव हूँ, मैं शिव हूँ, मैं शिव हूँ... मैं आग हूँ, मैं राख हूँ, मैं पवित्र रोष हूँ मुझमें कोई छल नहीं, मेरा कोई कल नहीं मैं पंख हूँ, मैं श्वास हूँ, मैं ही हाड़ माँस हूँ मैं मग्न - चिर मग्न हूँ, एकांत में, उजाड़ में... मैं शिव हूँ, मैं शिव हूँ, मैं शिव हूँ... मौत के ही गर्भ में हूँ, जिंदगी के पास हूँ अंधकार का आकार हूँ,  प्रकाश का प्रकार हूँ मैं कल नहीं,  मैं काल हूँ,  वैकुण्ठ या पाताल ही नहीं मैं मोक्ष का भी सार हूँ,  मैं पवित्र रोष हूँ, मैं अघोर हूँ... मैं शिव हूँ, मैं शिव हूँ, मैं शिव हूँ... मैं आदि हूँ, अ...

जब चली सर्द हवा मैंने तुझे याद किया

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दिल की चोटों ने कभी  चैन से रहने न दिया जब चली सर्द हवा  मैंने तुझे  याद किया ये मैं सौ जाँ से तिरे  तर्ज़-ए-तक़ल्लुम के निसार फिर तो फ़रमाइये  क्या आपने इरशाद  किया इसका रोना  नहीं  क्यों तुमने किया दिल बरबाद इसका ग़म है  कि बहुत देर से बरबाद किया इतना मानूस हूँ  फ़ितरत से कली जब चटकी झुक के मैंने ये कहा  मुझसे कुछ इरशाद किया मेरी हर साँस है  इस बात की शाहिद ऐ मौत मैंने हर लुत्फ़ के मौक़े पे  तुझे याद किया मुझको तो  होश नहीं  तुमको ख़बर हो शायद लोग कहते हैं  कि तुमने मुझे बरबाद किया कुछ नहीं इसके सिवा  'जोश' हरीफ़ों का कलाम वस्ल ने शाद किया  हिज्र ने ना-शाद किया Alpha's SHOWSTYLE