Posts

हे यौ दुल्हा, दुलरुआ बाजू की लेब....?

Image
                                                               हे यौ दुल्हा...                                                                     हे यौ दुल्हा...   हे.. यौ दुल्हा.... हे यौ दुल्हा, दुलरुआ बाजू की लेब...? आहाँ बाबू ल़ा साइकिल कि महिषे ल लेब... हे यौ दुल्हा, दुलरुआ बाजू की लेब....?                                 ...

एक कोने में ग़ज़ल की महफ़िल, एक कोने में मयखाना हो...

Image
गज़ल : मयखाना                                       लहरा के झूम-झूम के ला, मुस्कुरा के ला फूलों के रस में चाँद की किरणे मिला के ला...                                                                कहते हैं उम्रे-ए-रफ्ता कभी लौटती नहीं जा मयकदे से मेरी जवानी उठा के ला...                                      एक ऐसा घर चाहिए मुझको, जिसकी फ़ज़ा (फिजा) मस्ताना हो एक कोने में ग़ज़ल की महफ़िल, एक कोने में मयखाना हो...        ...

करते हैं मुहब्बत सब ही मगर...

Image
हर दिल को सिला तब मिलता है.. आधी रात को ये दुनियां वाले जब ख़्वाबों में खो जाते हैं. ऐसे में मुहब्बत के रोगी यादों के चराग जलाते हैं... करते हैं मुहब्बत सब ही मगर... हर दिल को सिला तब मिलता है... आती बहारें गुलशन में... हर फूल मगर तब खिलता है... करते हैं मुहब्बत सब ही मगर... मैं रांझा न था, तू हीर न थी... हम अपना प्यार निभा न सके, यूँ प्यार के ख्वाब बहुत देखे... ताबीर मगर हम पा न सके... मैंने तो बहुत चाहा लेकिन, तुम रख न सकी बातो का भरम... अब रह-रह कर याद आता है.. जो तुने किया एस दिल पे सितम,  करते हैं मुहब्बत सब ही मगर... पर्दा जो हटा दूँ  तेरे चेहरे से, तुझे लोग कहेंगे हरजाई, मजबूर हूँ मैं दिल के हाथों.. मंज़ूर नहीं तेरी रुसवाई... सोचा है कि अपने होठों पर मैं चुप की मुहर लगा दूंगा... मैं तेरी सुलगती यादों से अब इस दिल को बहला लूँगा... करते हैं मुहब्बत सब ही मगर... करते हैं मुहब्बत सब ही मगर... हर दिल को सिला तब मिलता है... आती बहारें गुलशन में...हर फूल मगर तब खिलता है... करते हैं मुहब्बत सब ही मगर... _______________________________ भरत अल्फा

मिलने का बहाना ...................

Image
गाँव तो एक बहाना है. गाँव में तो उनसे मिलने जाना है. वो कमीने दोस्त, जिनके साथ करते थे मस्ती. जब समोसा था दो रूपए का और चाय थी सस्ती..... कंधे पर रहता था एक दूजे का हाथ. सारे जग में लगता था अपना हो राज़. जिन्दगी के वो लम्हे, जो सिर्फ दोस्ती के नाम थे. हाथ में कभी गधे, तो कभी कुत्ते के लगाम थे... वो दूसरे के खेतों से गन्ने चुराना, वो चुपके से रातों को सिटी बजाना... वो पेड़ो की शाखों पे झूले लगाना, वो बूड्ढे की धोती में रॉकेट जलाना... वो खेतों की मेड़ों पे गप्पे लड़ाना, वो अरहर की डंडे से लड़ना-झगड़ना... वो तालाब जिसमे अक्सर नहाते थे हम, वो नदियाँ जिसमे नाव चलाते थे हम... वो दोस्त, वो गलियां, वो बूड्ढे, वो नदियाँ.... वो झूले, वो खेत, वो गन्ने, वो कलियाँ... समय उसे फिर से बुलाने लगी है... मुझे लगा शायद कोई मुझे बुलाने लगी है..... ____________________________ Bharat Alpha

बस इतना याद है और हमारे होठों पर मुस्कान तैर जाता है.....!!!

Image
दोस्ती एक ऐसा शब्द, जिसके एहसास भर से चेहरे पर खुशियाँ छाने लगती है.. मन में हजारों ख्याल उमरने घुमरने  लगते हैं... न चाहते हुए भी हम बादलों के पार एक ऐसी दुनियां में सफ़र करने लगते हैं, जहा सिर्फ और सिर्फ  खुशियों का ही बसेरा है... दिल तो यादों के गलियारों में बेफिक्र घुमने लगता है... फ्लैशबैक की साड़ी बातें हमारे सामने आकर खड़ी हो जाती है.. . बचपन में वो गिल्ली-डंडा खेलना, स्कूल बंक मार कर सिनेमा हॉल के बहार जाकर फिल्मों के पोस्टर निहारना... कॉलेज के दिनों में बीयर की पहली बोतल, बाइक  से शहर में घूमना, कॉलेज कैंटीन में बैठ कर घंटों बातें करना, बेल बजने के बाद भी क्लास में जाने की नो टेंशन ..... बस इतना याद है, और हमारे होठों पर मुस्कान तैर जाता है.....

इसमे होती नहीं शर्तें.. ये तो नाम है खुद एक शर्त में बांध जाने का....

Image
दोस्ती नाम है सुख-दुःख के अफसाने का... ये राज़ है सदा मुस्कुराने का... ये पल-दो-पल की रिश्तेदारी नहीं.. ये तो फ़र्ज़ है उम्र भर निभाने का... जिंदगी में आकर कभी वापस न जाने का... न जाने क्यूँ एक अजीब सी डोर में बांध जाने का... इसमे होती नहीं शर्तें.. ये तो नाम है खुद एक शर्त में बांध जाने का.... दोस्ती उस रिश्ते का नाम है जो, जो किसी न किसी रूप में हर relation  में मौजूद है. इसकी महक से हर रिश्ता खुद-ब-खुद मजबूत बनता है... दोस्ती एक एहसास है छुअन है, विश्वाश है.. _____________________________________BHARAT  ALPHA   

आरम्भ है प्रचंड बोले मस्तकों की झुंड आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो,...

Image
आरम्भ है प्रचंड बोले मस्तकों की झुंड आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो, आन-बाण-शान या कि जान का हो दान आज एक धनुष की बाण पर उतार दो, आरम्भ है प्रचंड ... मन करे सो प्राण दे जो मन करे सो प्राण ले वही तो एक सर्व शक्तिमान है, विश्व की पुकार है ये भागवत का सार है कि युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है, कौरवों की भीड़ हो या पांडवों की नीर हो जो लड़ सका है वो ही तो महान है... जीत की हवस नहीं, किसी पे कोई वश नहीं, क्या जिंदगी है ठोंकरों पे मार दो.? मौत अंत है नहीं तो मौत से भी क्यों डरें, ये जा के आसमान में दहाड़ दो... आरम्भ है प्रचंड ... हो दया का भाव या कि शौर्य का चुनाव या कि हार का हो घाव तुम ये सोच लो, या कि पूरे भाल भर जला रहे विजय का लाल, लाल ये गुलाल तुम ये सोच लो, रंग केसरी हो या मृदंग केसरी हो या कि केसरी हो लाल तुम ये सोच लो... जिस कवि की कल्पना में जिंदगी हो प्रेमगीत उस कवि को आज तुम नकार दो, भींगती नसों में आज फूलती रगों में आज आग की लपट का तुम बघार दो, आरम्भ है प्रचंड .... आरम्भ है प्रचंड बोले मस्तकों की झुंड आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो, आन-बाण-शान या कि जान का हो दान आज एक धनुष ...