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Wednesday, November 28, 2012

आँधी - तूफ़ान का क्या, तुझको कोई खौफ नहीं ?

कैसे...???


इस तरह तूने मुझको, गले लगाया कैसे ?
तेरा काज़ल मेरे रुखसार पर आया कैसे ?
आँधी - तूफ़ान का क्या, तुझको कोई खौफ नहीं ?
मुझसे मिलने भरी बरसात में, आया कैसे ?






बात करना भी गवारा ना था मुझसे तुमको...
टेलीफोन पर गीत मुहब्बत का सुनाया कैसे ?
मोबाइल पर ही ले लिया मेरे जज़्बात का बोसा...
भींगती रात में ये जश्न, मनाया कैसे ?






जिन्दगी राग भी, ग़ज़ल भी, नगमा भी है "अल्फा"...
दिल के सरगम पर इसे तूने गाया कैसे ?
ये तो चंद पल की कहानी है यारों...
अपने जिन्दगी से मुझको अलग बसाया कैसे ?





_______________ भरत अल्फा 


2 comments:

  1. kya bat hai bharat bhai mast lag raha hai
    good creation

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    1. धन्यवाद मित्र...

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