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Sunday, February 27, 2011

लोग कहते हैं मैं शराबी हूँ.....

लोग कहते हैं मैं शराबी हूँ.....


                      





लोग कहते हैं मैं शराबी हूँ...

तुमने भी  शायद यही सोच लिया...
                     




                            



किसी पे हुस्न का गुरूर, जवानी का नशा....
किसी के दिल में मुहब्बत की , रवानी का नशा...
किसी को देख के साँसों से, उभरता है नशा....
बिना पिए भी कभी हद से, गुजरता है नशा.





नशे में कौन नहीं है मुझे बताओ जरा...
किसी है होश मेरे सामने तो लाओ जरा...
नशा है सब पे मगर रंग नशे का है जुदा...


खिली -खिली  हुई सुबह पे है शबनम का नशा...
हवा पे खुशबू का बादल पे है रिमझिम  का नशा...




  


कहीं शुरूर है खुशियों का , कहीं  गम का नशा...
नशा शराब में होता तो, नाचती बोतल....
मयकदे झूमते पैमानों, में होती हल-चल....



नशे में कौन नहीं है मुझे बताओ जरा...
किसी है होश मेरे सामने तो लाओ जरा...

लोग कहते हैं मैं शराबी हूँ...
तुमने भी शायद यही सोच लिया...

थोड़ी आँखों से पिला दे रे सजनी दीवानी...
तुझे साँसों में बसा लूँगा सजनी दीवानी...
तुझे नौलखा माँगा दूंगा सजनी दीवानी....




लोग कहते हैं मैं शराबी हूँ.....




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